स्वरूपरानी अस्पताल परिसर में निर्माण पर हाईकोर्ट की सख्ती, बिना अनुमति कोई काम नहीं

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के खुले क्षेत्र में बिना अनुमति किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने यूपी सिडको की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई है।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। चिल्ड्रेन ब्लॉक के निर्माण से जुड़ी जानकारी को अस्पष्ट पाते हुए कोर्ट ने यूपी सिडको के मुख्य अभियंता को 20 अप्रैल तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें अब तक किए गए और आगे प्रस्तावित कार्यों का विस्तृत ब्यौरा देना होगा।
साथ ही राज्य सरकार को 31,314 वर्गमीटर भूमि के संबंध में भी हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। याचिकाकर्ता डॉ. अरविंद गुप्ता और डॉ. अनिरुद्ध प्रसाद गुप्ता की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी ने बताया कि भूमि हस्तांतरण के लिए राजस्व विभाग को छोड़कर सभी विभागों से एनओसी मिल चुकी है। राजस्व विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल परिसर की आंतरिक सड़कों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और एक सप्ताह से दस दिनों में कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वहीं, यूपी सिडको की ओर से 9 अप्रैल 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई, लेकिन न्यायालय इससे संतुष्ट नहीं हुआ।
कोर्ट ने पाया कि भवन के विभिन्न फ्लोरों पर निर्माण को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। तस्वीरों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने टिप्पणी की कि भवन में केवल टाइल्स और कुछ आंतरिक कार्य शेष हैं, जिन्हें लंबे समय से पूरा नहीं किया जा रहा, जबकि राज्य सरकार धन उपलब्ध करा चुकी है।
अदालत ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निर्देश दिया कि अस्पताल के खुले क्षेत्र में बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति कोई नया निर्माण न होने दिया जाए। साथ ही प्राचार्य को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर विभिन्न विभागों को आवंटित भूमि का पूरा विवरण देने को कहा गया है।
इसके अतिरिक्त, न्यायमित्र से छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों के हॉस्टल से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

