निजी संपत्ति पर नमाज के नाम पर भीड़ जुटाने पर रोक, शांति व्यवस्था सर्वोपरि: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति के अधिकार की आड़ में सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने कहा कि निजी संपत्ति पर भीड़ एकत्र कर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि ऐसे किसी कार्य से शांति व्यवस्था भंग होती है, तो प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बरेली निवासी तारिक खान द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची ने रमजान के दौरान निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने से रोके जाने और शांति भंग के आरोप में किए गए चालान को चुनौती दी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने पहले बरेली के जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को तलब किया था। कोर्ट के निर्देश पर दोनों अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए और पूर्व आदेश के अनुपालन की जानकारी दी।

