March 11, 2026

बरेली दंगा आरोपियों की याचिकाएं खारिज़ हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार

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-बरेली दंगा आरोपियों की याचिकाएं खारिज़ हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली दंगे में शामिल चार आरोपियों को राहत देने से इंकार करते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दी है। याचिकाओं में दर्ज एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर व न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आरोपी आशू, अज़मल राफी, नईम कुरैशी और मो साजिद की याचिकाओं पर दिया है।
कोर्ट ने कहा याचिका में हम आरोपों की सच्चाई या झूठ की पड़ताल नहीं कर सकते। प्रथमदृष्टया आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।जिसकी गहन जांच और अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जरूरत है।यह ऐसा मामला नहीं कि एफआईआर रद की जाय।
मालूम हो कि 26 सितंबर 2025 को मौलाना तौकीर रज़ा के आह्वान पर मुस्लिम समुदाय के लोग मुस्लिम युवाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज़ करने के विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। भीड़ में मौजूद कुछ लोग आपत्तिजनक नारे लगाने लगे। पुलिस ने ऐसा करने से रोका। किंतु किसी से फोन पर मिले निर्देश पर भीड़ उत्तेजित हो गई और पुलिस कर्मियों पर हमला कर दिया। ईट पत्थर और लाठी डंडों से पुलिस पर हमला हुआ, पेट्रोल बम भी फेंके गए। फायरिंग भी की गई। पुलिस कर्मी घायल हुए।
थाना बारादरी के एसएचओ धनंजय पांडेय ने 28 नामजद लोगो और सैकड़ों अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ किया है।
याचियों का कहना था कि वे घटना में शामिल नहीं थे। उनको रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। कुछ याचियों का कहना था कि वे घटना के समय किसी अन्य जगह पर थे। सैकड़ों की भीड़ में 28लोगो के खिलाफ नामजद रिपोर्ट है। उन्हें कैसे पहचाना गया। एफआईआर दर्ज करने में भी देरी की गई है।भीड़ में किसी की शिनाख्त नहीं हो सकती। पुलिस ने मनमाने तरीके से याचियों को मुकदमे में फंसा दिया।
याचिका का विरोध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि घटना काफी गंभीर है। आरोपियों ने पुलिस पर जानलेवा हमला किया। देश विरोधी नारे लगाए और कानून व्यवस्था को पूरी तरह से छिन्न भिन्न कर दिया। कोर्ट ने कहा याचियों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब याचिका में नहीं दिया जा सकता।यह साक्ष्य का विषय है जिसका हल ट्रायल में ही हो सकता है।इन तर्कों के आधार पर एफआईआर रद नहीं की जा सकती।

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