निलंबित शिक्षक को दूसरे की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बी एस ए भेजते थे संदेश, हाईकोर्ट ने निलंबन पर लगाई रोक, मांगा जवाब

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा ज़िले के एक शिक्षक के निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए गंभीर टिप्पणी की हैं।
अदालत ने पाया कि जिस आधार पर शिक्षक को निलंबित किया गया, उसी मामले में स्वयं बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता को अनुपस्थित शिक्षक की उपस्थिति दर्ज करने के लिए बार-बार संदेश भेजे जाते थे।
यह आदेश न्यायमूर्ति श्रीमती मंजू रानी चौहान ने कुशल सिंह की याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जहान्वी सिंह ने न्यायालय को बताया कि 02 जनवरी 2026 को पारित निलंबन आदेश पूरी तरह मनमाना एवं तथ्यहीन है।
बहस के दौरान यह तथ्य विशेष रूप से सामने लाया गया कि याचिका में ऐसे संदेश मौजूद हैं, जिनमें बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वयं याचिकाकर्ता को एक शिक्षक की उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दे रहे थे, जबकि वही शिक्षक वास्तव में अनुपस्थित था। इसके बावजूद, निलंबन आदेश में याचिकाकर्ता पर आरोप लगाया गया कि उसने उस शिक्षक को अनुचित लाभ पहुँचाया, जो प्रथम दृष्टया विरोधाभासी है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि निलंबन आदेश कथित दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर आधारित बताया गया है, जबकि वास्तविक निरीक्षण केवल एक ही व्यक्ति द्वारा किया गया था और आरोप अस्पष्ट एवं सामान्य प्रकृति के हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 को तय की है। तब तक के लिए निलंबन आदेश दिनांक 02 जनवरी 2026 के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई है।

