इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम लिखने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम लिखने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि किसी भी फैसले में जजों के नाम नहीं, बल्कि केवल फैसले का संदर्भ और सिटेशन ही लिखा जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी परंपरा न्यायिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है और इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति समित गोपाल ने प्रियांक कुमार बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में याचिका खारिज करते हुए की। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट जज द्वारा की गई इस गलती की निंदा करते हुए भविष्य में इसे न दोहराने की सख्त नसीहत दी।
हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति सभी जिला जजों को भेजने के निर्देश दिए हैं और 18 फरवरी 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। कोर्ट का उद्देश्य न्यायिक कार्यप्रणाली में एकरूपता और अनुशासन सुनिश्चित करना बताया गया है।

