केंद्रीय बजट प्रदेश के हितों के विपरीत, हिमाचल के साथ हुआ अन्याय: विधायक नीरज नैय्यर

नीरज नैय्यर, विधायक चम्बा
रिपोर्ट अशोक कुमार, ब्यूरो चम्बा
चंबा: चंबा के विधायक नीरज नैय्यर ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हिमाचल प्रदेश के हितों के पूरी तरह विपरीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में प्रदेश की आम जनता, किसानों, बागवानों और युवाओं की उम्मीदों को दरकिनार किया गया है।विधायक नीरज नैय्यर ने जारी एक बयान में कहा कि पहाड़ी राज्यों की विशेष भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों की अनदेखी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार पर हिमाचल के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बजट राज्य के विकास की गति को रोकने वाला है।आपदा प्रभावित हिमाचल को मिली निराशानैय्यर ने कहा कि पिछले वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने भारी प्राकृतिक आपदाओं, मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण हजारों करोड़ रुपये का नुकसान झेला है। प्रदेश की जनता को उम्मीद थी कि इस बजट में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए किसी विशेष पैकेज या वित्तीय सहायता का प्रावधान किया जाएगा, लेकिन केंद्र सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी साध ली है।राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) बंद करना चिंताजनकविधायक ने राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करने के केंद्र के फैसले को राज्य की अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार बताया। उन्होंने कहा, “हिमाचल जैसे सीमित संसाधनों वाले छोटे राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान एक अनिवार्य वित्तीय सहारा था। इसे बंद करने से राज्य की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से कमजोर होगी, जिससे चल रहे विकास कार्यों और जनहित की योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।”जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों की अनदेखीनैय्यर ने यह भी रेखांकित किया कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे अधिक संवेदनशील है। बजट में जलवायु चुनौतियों से निपटने और पहाड़ी राज्यों को ठोस सहायता देने के लिए कोई विजन दिखाई नहीं देता।पुनर्विचार की मांगविधायक नीरज नैय्यर ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह बजट प्रावधानों पर पुनर्विचार करे। उन्होंने आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश को उसकी वास्तविक आवश्यकताओं, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप न्यायसंगत बजटीय सहयोग प्रदान किया जाए ताकि प्रदेश का विकास बाधित न हो।

