फरवरी में 10% बढ़कर आएगा बिल:बिजली कंपनियों ने नवंबर में 4.94 रुपए की बजाय 5.79 रुपए की दर से खरीदी थी बिजली
फरवरी में 10% बढ़कर आएगा बिल:बिजली कंपनियों ने नवंबर में 4.94 रुपए की बजाय 5.79 रुपए की दर से खरीदी थी बिजली

यूपी में 3.60 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को फरवरी 2026 में महंगाई का झटका लगने वाला है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) ने फरवरी में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने का आदेश जारी कर दिया है। मतलब आपको प्रति 100 रुपए पर वैट आदि जोड़कर 12 रुपए की चपत लगेगी। एफसीए का ये चार्ज नवंबर 2025 में खरीदी गई बिजली की वास्तविक कीमत की भरपाई के लिए बढ़ाया गया है।
पावर कॉरपोरेशन का दावा है कि नवंबर 2025 में बिजली खरीद की वास्तविक दर 5.79 रुपए प्रति यूनिट रही। जबकि नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत टैरिफ में यह दर मात्र 4.94 रुपए प्रति यूनिट है। इसी अंतर के आधार पर ईंधन अधिभार लगाकर अतिरिक्त वसूली का आदेश जारी किया गया है।
*गर्मी में डिमांड के समय सस्ती बिजली ठंड में कैसे हो गई महंगी*
बिजली के जानकार इस पर हैरानी जता रहे हैं। उनका तर्क है कि जब प्रदेश में भीषण गर्मी थी, तब भी इतनी महंगी दर पर बिजली नहीं खरीदी गई थी। अब ठंड में जब बिजली की डिमांड काफी कम है, तो इतनी महंगी किस लिए खरीदी गई। इसके पीछे बड़ी धांधली की बात कही जा रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी सवाल उठाया है। परिषद का दावा है कि मई 2025 में भीषण गर्मी थी। बिजली संकट और रिकॉर्ड मांग के बावजूद पावर कॉरपोरेशन ने बिजली 4.76 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी थी। ऐसे में नवंबर 2025 जैसे ठंडे और सामान्य महीने में 5.79 रुपए की दर से बिजली खरीदी करने की क्या मजबूरी आन पड़ी?
*हर महीने ईंधन एवं पावर खरीद लागत के आधार पर तय होता है FPPAS*
UPPCL हर महीने ईंधन एवं पावर खरीद लागत के आधार पर फ्यूल एंड पावर पर्चेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) तय करता है। लेकिन इस बार की 10% वसूली के आदेश पर बिजली उपभोक्ता भी हैरान है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया गया है।

