शंकराचार्य के अपमान के लिये क्षमा मांगे सरकार: अजय राय

प्रयागराज: मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट पर जाने से रोक दिया, जिससे मेला क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। शंकराचार्य के काफिले को रोकने पर उनके आगे चल रहे बटुकों, समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, और देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरु हो गई। जिसके बाद मेला क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समर्थकों को धक्का देकर पीछे हटाया, जिससे संतों ने विरोध करना शुरु कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि शंकराचार्य ने पैदल जाने का अनुरोध किया था, लेकिन काफिले के अनुयायी दर्शन के लिए टूट पड़ते हैं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इससे नाराज शंकराचार्य वापस त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने आश्रम के बाहर साधू संतो के साथ धरने पर बैठ गये। वहीं शंकराचार्य के धरने पर बैठने की सूचना मिलते ही प्रदेश कांग्रेस के महासचिव मुकुंद तिवारी और विवेकानंद पाठक भी बड़ी संख्या में कांग्रेसियों के साथ मौके पर पहुंच गये।
इस दौरान यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से फोन पर बात की। अजय राय ने मौनी अमावस्या स्नान पर साधु-संतों के साथ हुए दुर्व्यवहार की घटना को अक्षम्य बताते हुए भाजपा सरकार की नाकामी और अहंकारी रवैये को जिम्मेदार ठहराया। जिसमें उन्होंने इसे सनातन धर्म और संतों का अपमान बताया और इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए सरकार से सम्पूर्ण संत व सनातन समाज से अविलम्भ क्षमा याचना करने की मांग की। प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी ने कहा की धर्म और अध्यात्म की नगरी में अनुभवहीन अधिकारियों के चलते शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का अपमान, देश की सनातन संस्कृति का अपमान है। प्रदेश महासचिव विवेकानंद पाठक ने कहा की धार्मिक पर्व को भाजपा अपने प्रचार प्रसार और इवेंट का हिस्सा बनाने पर तुली है। आरोप लगाया की सरकार माघ मेले का राजनीतिक लाभ लेने के लिये संत महात्माओं को षड़यंत्र के तहत अपमानित कर रही है। जिसका विरोध किया जायेगा।

