चम्बा में हर साल की भांति इस वर्ष भी 25 दिसंबर को चर्च चम्बा में व पूरी दुनिया में क्रिसमस डे बड़े हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया

रिपोर्ट अशोक कुमार, ब्यूरो चम्बा
चम्बा में हर साल की भांति इस वर्ष भी 25 दिसंबर को चर्च चम्बा में व पूरी दुनिया में क्रिसमस डे बड़े हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जाता है। यह पर्व ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह (यीशु मसीह) के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि ईसा मसीह का जन्म मानवता को प्रेम, शांति, करुणा और सेवा का संदेश देने के लिए हुआ था।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यीशु मसीह का जन्म बेथलेहम में एक साधारण गौशाला में हुआ था। उनके जन्म को मानव इतिहास की एक महान घटना माना जाता है, क्योंकि उन्होंने समाज को सत्य,क्षमा और प्रेम के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी।
क्रिसमस डे केवल ईसाई समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्व सद्भाव, आपसी प्रेम सभी धर्म को और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। इस दिन चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं, कैरोल गीत गाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को उपहार देकर खुशियां बांटते हैं।
क्रिसमस ट्री सजाने, सांता क्लॉज की परंपरा और केक काटने का विशेष महत्व होता है। सांता क्लॉज को बच्चों के लिए खुशी और उदारता का प्रतीक माना जाता है, जो निस्वार्थ भाव से देने की प्रेरणा देता है।
आज के समय में क्रिसमस डे हमें यह संदेश देता है कि धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यही कारण है कि क्रिसमस को दुनिया भर में प्रेम और सौहार्द का पर्व माना जाता है। चम्बा में भी तडोली व डलहौजी चर्च में कार्यक्रम किए जाते हैं इसमें लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। यहां पर आए हुए लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया जाता है।

